Thursday, 19 January 2017

कविता [] राकेश सोहम

चुनाव आ गए 
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वे फिर द्वारे आ गए
भैया चुनाव आ गए।

पिछले  बार  हंसे  थे
घर के भीतर घुसे थे
अम्मा के पाँव पड़े थे
बाद में कहाँ बिला गए ?

भैया चुनाव आ गए .......

अब की बार न भूलेंगे
आनंद के झूले झूलेंगे
दद्दा  जी  न  कूलेंगे
हाथ जोड़कर जता गए !

भैया चुनाव आ गए .......

3 comments:

  1. वे फिर द्वारे आ गए
    भैया चुनाव आ गए।

    पिछले बार हंसे थे
    घर के भीतर घुसे थे
    अम्मा के पाँव पड़े थे
    बाद में कहाँ बिला गए ?

    भैया चुनाव आ गए ....... बहुत खूब!

    ... एक बार फिर,
    एक बार फिर,
    ५ साल का फेरा

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    Replies
    1. धन्यवाद कविता जी
      जो कविता पसंद आई

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  2. Amazing blog and very interesting stuff you got here! I definitely learned a lot from reading through some of your earlier posts as well and decided to drop a comment on this one!

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सुस्वागतम!!