Tuesday, 25 January 2011

आजादी को भीख ना समझो कीमत दी है..

आजादी को भीख ना समझो कीमत दी है..
देकर अपना लाल लहू यह रंगत दी है..
आज तिरंगा गीले नयन निहार रहा है..
देशभक्त वीरों को पुनः पुकार रहा है...
(डाक्टर सारस्वत मोहन मनीषी की कविता से)
-अनिल आर्य

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