Sunday, 30 January 2011

मत समझो आजादी गांधी ही लाया था....


मत समझो आजादी गांधी ही लाया था....
बिस्मिल ने भी इसकी खातिर रक्त दिया था...
बंगाली बाबू का भी बलिदान ना कम है...
कितने अश्फाकों ने इसमें वक़्त दिया था...
कली- कली निर्दय माली पर गुस्साई थी,
सच कहता हूँ तब ही आजादी आई थी...
लाखों दीवानों ने गर्दन कटवाई थी
सच कहता हूँ तब ही आजादी आई थी..
(डॉ सारस्वत मोहन मनीषी की कविता का एक अंश )

5 comments:

  1. लाखों दीवानों ने गर्दन कटवाई थी
    सच कहता हूँ तब ही आजादी आई थी..

    बहुत दमदार बात।

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  2. बहुत बहुत सही...

    नामचीन गुमनाम उन सभी शादीहों को सादर नमन !!!

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