Friday, 30 July 2010

हरिशंकर राढ़ी को दीपशिखा वक्रोक्ति सम्मान

कहते हैं बोया पेड़ बबूल का तो आम कहां से खाय! अगर आदमी ढंग का हो, तो उसे अपमान भी ढंग का मिलता है, लेकिन जब आदमी ही ढंग का नहीं होगा तो सम्मान भी उसे कोई कहां से ढंग का देगा. पिछले दिनों कुछ ऐसी ही बात भाई हरिशंकर राढ़ी के साथ हुई. ज़िन्दगी भर इनसे-उनसे सबसे रार फैलाते रहे तो कोई पुरस्कार भी उन्हें ढंग का क्यों देने लगा! हाल ही में उन्हें देवनगरी कहे जाने वाले हरिद्वार में एक ऐसे पुरस्कार से नवाजा गया जिसका नाम दीपशिखा वक्रोक्ति सम्मान है.

 
यह सम्मान उन्हें हरिद्वार में दीपशिखा साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच,ज्ञानोदय अकादमी के एक आयोजन में दिया गया. आचार्य राधेश्याम सेमवाल की अध्यक्षता में दो सत्रों में हुए इसी आयोजन में शायर जनाब अजय अज्ञात को भी दीपशिखा इकबाल सम्मान से नवाजा गया. आयोजन के दूसरे सत्र में कवि गोष्ठी भी हुई. निर्मला छावनी में हुए इस पूरे कार्यक्रम का संचालन कवि-कहानीकार के एल दिवान ने किया. हरिशंकर राढ़ी का स्वागत दीपशिखा मंच के अध्यक्ष डॉ. शिवचरण विद्यालंकार ने किया. श्री के0 एल0 दिवान ने अपने स्वागत भाषण में हरिशंकर राढ़ी को परसाई परम्परा का समर्थ वाहक बताते हुए कहा कि
एक समर्थ साहित्यकार का सम्मान करना स्वयं का एवं साहित्य का सम्मान करना होता है.
गोष्ठी के दूसरे चरण में काव्यपाठ करते हुए संगत मंच के संस्थापक अध्यक्ष गांगेय कमल ने कहा- ‘ चलो पुल एक ऐसा बनाएं / नफरत जिसके नीचे छोड़ आएं। गजलकार कीमत लाल शर्मा ने अपने मन का दर्द कुछ यूँ बयाँ किया -‘ शीशे रहा हूँ बेच मैं अन्धों के शहर में/ दिखता नहीं किसी को टूटे सभी भरम.‘ अपनों से निभाने की बात कही सुमेरु मंच के संस्थापक अध्यक्ष राधेश्याम सेमवाल ने -‘ दर्द अपनों ने दिया सहा कीजिए/ साथ समय के अपनों में रहा कीजिए. गोष्ठी में उपस्थित दीपशिखा मंच की उपाध्यक्षा श्रीमती संतोष रंगन ने अपने काव्यपाठ से खूब वाहवाही बटोरी. सचिव आचार्य सुशील कुमार त्यागी ने गोष्ठी के दूसरे चरण का संचालन किया और अपने काव्यपाठ से गोष्ठी को सजाया. उपस्थित कई अन्य कवियों ने कविता पाठ किया. के0एल0 दिवान ने हरिशंकर राढ़ी के अब तक प्रकाशित व्यंग्य लेखों के मुख्य अंशों का पाठ किया और बाद में अपने काव्य पाठ से गोष्ठी केा गरिमा प्रदान की. अन्त में दीपशिखा अध्यक्ष डॉ शिवचरण विद्यालंकार ने गोष्ठी में उपस्थित लोगों को धन्यवाद दिया.

9 comments:

  1. हरिशंकर राढ़ी को दीपशिखा वक्रोक्ति सम्मान के लिए शुभकामनाएँ!
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    कार्यक्रम की रपट बढ़िया रही!

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  2. बहुत बधाई हो राढ़ी साहब को।

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  3. राढ़ी जी को ढेरों बधाई...

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  4. हरिशंकर राढ़ी जी को कोटिश: बधाई. जल्दी से मिठाई भी भिजवाएं.

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  5. बहुत बहुत बधाइयाँ व शुभकामनाएं...

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  6. राढ़ी जी को वक्रोति सम्मान के लिए बधाई....
    इष्टदेव जी इ खबरिया को तेवर पर भी चेपना चाह रहा हूं...एगो मेलवा कर कर दिजीये...कंटेटेवा और फोटुआ के साथ....इहवां से उठावे में तनी दिक्कत आ रहा है....
    आलोक नंदन

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  7. Thanks a lot to all of you for your wishes! Bhai Ishtdeo ji to dhanyavad ke patra nahin balki mahapatra hain. Jiske Ishtdeo ji jaise mitra honge, usey apmaan ki aadat na ho, impossible! Everyone knows that ' A man is known by company he keeps.'Thanks again for your company.

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  8. हमारे ही बीच के श्री हरिशंकर जी को सम्मान मिलने से स्वयं सम्मानित महसूस कर रहा हूँ . लम्बे अंतराल के बाद ब्लॉग पर आ सका और उनके सम्मान की जानकारी मिली . उन्हें बहुत बहुत बधाई .
    [] राकेश 'सोहम'

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