Wednesday, 10 March 2010

चाहिए एक ख्वाब

रतन
चाहिए एक ख्वाब
हसीन हो जो
सकून दे वो
झरनों सी झर-झर
बारिश सी झम-झम
कलियों की चटकन
पायल की छम-छम
झांझर की झन-झन
कंगन की खन-खन
हवाओं की सर-सर
फिजाओं की रौनक
हो जिसमें
चाहिए एक ख्वाब
बसे गुंजन में
रहे तन-मन में
नाचे आंगन में
महके उपवन में
सुरमई शाम में
हर एक काम में
पीपल की छांव में
सपनों के गांव में
जो ले जाए नित मुझको
चाहिए एक ख्वाब

2 comments:

  1. एक ख्वाब मेरा भी
    कि
    उसके पूरे न हो पाने में भी,
    प्रसन्न रहने का ख्वाब ।

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  2. वाह...वाह...वाह....बहुत सुन्दर...

    ऐसा ख्वाब किसे न चाहिए होगा....

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