Saturday, 2 January 2010

नई शाम

नव वर्ष की शाम में डूबे
कितने युवा जाम में डूबे ।

जो गुंडे हैं गरियाये,
मोटर-साइकिल की शान में डूबे ।

प्रेमियों ने तलाशे कोने,
यौवन की उड़ान में डूबे ।

ढलती शाम का दर्द ढो रहे,
प्रार्थना और अज़ान में डूबे ।

जो बहक गये क़दम उनके,
जवानी के उफ़ान में डूबे ।

पार्टी की छवि सुधारने को,
राजनीति और राम में डूबे
[] राकेश 'सोहम'

11 comments:

  1. नव वर्ष 2010 की हार्दिक-हार्दिक शुभ मंगल कामनाएं.

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  2. हम जैसे बैल और गधे
    उस दिन भी काम में डूबे

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  3. आपको भी नया साल मुबारक हो

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  4. जो बहक गये क़दम उनके,
    जवानी के उफ़ान में डूबे ।

    सही है.
    नव वर्ष की शुभकामना.

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  5. बेहतरीन। लाजवाब। आपको नए साल की मुबारकबाद।

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  6. इस नये वर्ष में आप हर्षित रहें,
    ख्याति-यश में सदा आप चर्चित रहें।
    मन के उपवन में महकें सुगन्धित सुमन,
    राष्ट्र के यज्ञ में आप अर्पित रहें।।

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  7. नए साल में हिन्दी ब्लागिंग का परचम बुलंद हो
    स्वस्थ २०१० हो
    मंगलमय २०१० हो

    पर मैं अपना एक एतराज दर्ज कराना चाहती हूँ
    सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगर के लिए जो वोटिंग हो रही है ,मैं आपसे पूछना चाहती हूँ की भारतीय लोकतंत्र की तरह ब्लाग्तंत्र की यह पहली प्रक्रिया ही इतनी भ्रष्ट क्यों है ,महिलाओं को ५०%तो छोडिये १०%भी आरक्षण नहीं

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  8. फिलहाल तो मैं इस में नहीं हूं.

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  9. SAHI SAHI..BAHUT SAHI KAHA AAPNE...YAHI TO VASTAVIK STHITI HAI....

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