Friday, 25 September 2009

भारत के दिल की भाषा है हिंदी


भारतीय दूतावास में आयोजन, चीनी मूल के सात हिंदी विद्वान सम्मानित
हिन्दी पखवाड़े के तहत आयोजनों का क्रम केवल देश के भीतर ही नहीं, बाहर भी चल रहा है. भारत से बाहर हिंदी की अलख जगाने के इसी क्रम में चीन में पेकिंग स्थित भारतीय दूतावास के सांस्कृतिक केंद्र के तत्वावधान में एक आयोजन किया गया. इस आयोजन में चीन के सात वरिष्ठ हिंदी विद्वानों को सम्मानित किया गया.
चीन से यह सूचना पेकिंग विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर इंडिया स्टडीज़ में प्रोफेसर डॉ. देवेंद्र शुक्ल ने दी. सम्मानित किए गए विद्वानों में प्रो. लियोऊ आनवू, प्रो. यिन होंयुवान, प्रो. चिन तिंग हान, प्रो. च्यांग चिंगख्वेइ, प्रो. वांग चिंनफङ, प्रो. छङ श्वेपिन, प्रो. चाओ युह्वा शामिल हैं. इसके अलावा इस अवसर पर हिंदी निबंध प्रतियोगिता भी आयोजित की गई.
इस प्रतियोगिता में चाइना रेडियो की थांग य्वानक्वेइ को प्रथम, पेकिंग विश्वविद्यालय के ली मिन (विवेक) को दूसरा, कुमारी रोशनी को तीसरा तथा चन्द्रिमा और ह्वा लीयू को सांत्वना पुरस्कार प्राप्त हुए. जबकि इसी आयोजन भारतीय मूल वर्ग में हेमा कृपलानी को प्रथम, हेमा मिश्रा को द्वितीय और आरुणि मिश्रा को सांत्वना पुरस्कार मिला.
आयोजन के मुख्य अतिथि एवं भारतीय दूतावास के मिशन के उप प्रमुख जयदीप मजूमदार ने कहा कि हिंदी भारत की केवल राजभाषा या राष्ट्र भाषा ही नहीं है, यह भारत के ह्वदय की भाषा है. यह सांस्कृतिक समन्वय और मानसिक आजादी की भाषा है. अन्तरराष्ट्रीय जगत में हिन्दी के लोक प्रियता बढ़ रही है. विशेष रूप से चीन में हिन्दी के अध्ययन और अध्यापन की विशिष्ट परंपरा है. हिन्दी दिवस पर चीनी विद्वानों का यह सम्मान चीन और भारत के प्राचीन सम्बंधों के सुदृढीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. चीन के हिन्दी प्रेमियों की आज इतनी बड़ी संख्या में उपस्थिति हिन्दी की लोकप्रियता और आप के हिन्दी एवं भारत प्रेम का प्रमाण है.
पेकिंग विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में अतिथि प्रोफेसर डॉ देवेन्द्र शुक्ल ने कहा कि आज हिन्दी का राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय संदर्भ दोनों बहुत ही महत्वपूर्ण हैं. आज हिन्दी विश्व भाषा का रूप धारण कर रही है. भारतीय दूतावास का यह आयोजन हिन्दी के लिए एक शुभसंकेत. हिन्दी भारत और विश्व की संस्कृति के संवाद का मंच बने. तभी हम विश्व हिन्दी का विश्व मन रच सकेंगे.
चायना रेडियो इंटरनेशनल के सलाहकार एवं वरिष्ठ हिन्दी पत्रकार प्रो. वांग चिनफ़ङ ने कहा कि हिन्दी हमें विश्वबंधुत्व और प्रेम का संदेश देती है. हिन्दी उस सुगंध की तरह है जो विश्व के सामान्य जन को संबोधित है. चीन के लोगों को उस में प्रेम और आत्मीयता का अनुभव होता है.
हिन्दी दिवस कार्यक्रम का कुशल संयोजन एवं संचालन सांस्कृतिक सचिव चिन्मय नायक ने किया उन्होंने कहा कि यह हिन्दी दिवस केवल एक कार्यक्रम मात्र नहीं है, बल्कि यह हिन्दी के मंच पर चीन और भारत के मिलन का सौहार्द-प्रतीक भी है.

9 comments:

  1. दिल और कागज में बड़ा अन्तर आ जाता है. विश्व हिन्दी सम्मेलन में सम्मलित होने का प्रमाण पत्र सरकार की तरफ से अंग्रेजी में थमा दिया जाता है, दिल से हिन्दी को बढ़ावा देने में योगदान करने को.

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  2. बहुत अच्छी बात कही आपने. साधुवाद.

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  3. हिन्दी का परचम लहरा रहा है !

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  4. बहुत अच्छा लगा. काश हिंदी लेखन के लिए देवनागरी के बदले ब्राह्मी को अपनाया गया होता.

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  5. आदरणीय सुब्रमण्यन जी
    मैं ब्राह्मी नहीं जानता. लेकिन जानना चाहता हूं कि ब्राह्मी की क्या ख़ासियत है और अगर हिन्दी के लिए इसे अपनाया गया होता तो इससे क्या लाभ हो सकता था. मुझे आपके ब्लॉग पर इंतज़ार रहेगा, ऐसी किसी पोस्ट का. आप चाहें तो इयत्ता पर भी लिख सकते हैं. स्वागत है.

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  6. हिंदी तो धूम मचाएगी ही...चाहे कुछ भी हो जाये...ब्राही के बारे में मैं भी नहीं जानता....जानना चाहूंगा...ईष्टदेव जी आप तो चीन तक पहुंच गये...मजा आ गया।।।।

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  7. अच्छा लगा चीन में हिन्दी कार्यक्रम के बारे में जानना।

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  8. mujhe bahut khusee huee is post ko padhkar. Hindi bhasha ko bas uska wajeeb samman chahiye. ham aur kuch nahin mangte. lekin nigode rajnitee ko yah raas nahin aatee. Nepal me jo ho raha hai uskee alochna kyon nahin kar raha koi ?

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