Friday, 2 October 2009

उस रात !!!!

राकेश 'सोहम'

वर्ष 1980 ।
मुझे ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग में दाखिला मिला था । होस्टल भर चुका था । फ़िर वार्डन से बार-बार अनुग्रह करने पर बताया गया की एक कमरा अब भी खाली है, लेकिन वह पूरा कबाड़खाना है और साफ़-सफाई कराना पड़ेगी । पिताजी ने सहमति देते हुए कहा - 'चलेगा । शहर से कॉलेज दूर पड़ेगा इसलिए हॉस्टल में रहना ज्यादा ठीक है । '
में हॉस्टल में रहने लगा । बाद में रूम-पार्टनर मोहन भी साथ रहने लगा । लगभग महीने भर होने को था । तभी एक दिन -
मेस के खानसामा ने खाने के दौरान राज खोलते हुए मुझसे पूछा, 'और कैसा लग रहा है हॉस्टल में ?'

'बहुत मज़ा आ रहा है ..बस मस्ती', ज़वाब मेरे रूम-पार्टनर ने दिया । मैंने हाँ में सर हिलाया ।
'चलो अच्छा है वरना उस रूम में कोई रहता नहीं था । दो साल से बंद था । उसमें दो वर्ष पूर्व एक स्टुडेंट ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी ।' यह सुनकर कुछ देर के लिए हम दोनों स्तब्ध रह गए । चूंकि हम लोग उस रूम में महीने भर आराम से रहकर गुजार चुके थे इसलिए फ़िर बेफ़िक्र हो गए ।
उस दिन मोहन हफ्ते भर का कहकर घर जाने के लिए निकला था लेकिन फ़िर तीसरे दिन शाम को लौट आया । अपने अंदाज़ में बोला, 'यार, तेरे साथ रहने में मज़ा आता है । आज मैं आ गया हूँ खूब मस्ती करेंगे ।'
उस रात हम दोनों गाते बजाते धूम-धडाम करते रहे । मैं गाता अच्छा था, वह टेबल ऐसे पीटता था मानो तबला बज रहा हो । फ़िर देर रात तक हम दोनों अपने-अपने बिस्तर पर बैठे बतियाते रहे । वह हाँ -हाँ करता रहा, शायद नींद में था इसलिए मेरी बडबड मज़े लेकर सुनता रहा ।
अचानक बाहर हवा बदहवास हो चली थी । बादलों की गडगडाहट के साथ बूंदाबांदी शुरू हो गई थी । मैं एक-बारगी चौंका, 'लो, अब बेमौसम बरसात .... हाय रे ऊपरवाले !' जैसे मोहन मेरे मन की बात समझ गया । उसकी रहस्यमयी मुस्कान मेरी नज़रों में खटक गईमैंने इस विचार को झटक दिया और नींद कब लगी पता नहीं चला ।
प्रातः प्रहार अचानक नींद खुल गयी । मोहन अंधेरे में ठीक उसी तरह अपने बिस्तर पर बैठा था जैसे मैनें उसे रात में सोने के पूर्व देखा था । मुझे आश्चर्य हुआ, 'क्यों बे डरा क्यों रहा है ? नींद नहीं आ रही क्या ?'
'नहीं', वह मेरी तरफ़ देखकर मुस्कुराया, 'आज शाम बहुत मज़ा आया, सच तुम मेरे अच्छे मित्र हो ।'
'हूँ, अब सो जाओ सुबह बात करेंगे', मैंने करवट ली थी की किसी ने दरवाज़े पर दस्तक दी । 'अब इतनी सुबह कौनm आ गया ? ' मैनें लगभग चिढ़ते हुए कहा, 'मोहन, जा दरवाजा खोल दे ।'

'तू खोल दे', उसने कहा ।

'उफ़, तू भी यार, .....चलो मैं ही खोलता हूँ.....सबसे अच्छा मित्र जो माना है ।' मैं उठकर दरवाजे की ओर बढ़ गया। दरवाजे के ठीक ऊपर लगी घड़ी में ४ बजने को था । रात्री समाप्ति की थी ।

'इतनी सुबह कौन हो सकता है ?', मैंने जांच लेने की गरज से आवाज़ लगाई , 'कौन है बाहर ?'

बाहर से मोहन की चिर-परिचित अंदाज़ में आवाज़ आई, 'अबे स्साले ....दरवाजा खोल....मैं हूँ मोहन ...कब से दरवाजा पीट रहा हूँ...... ।'

मैं सिहर गया । दरवाजे की चटकनी पर हाथ रखते हुए पीछे पलटकर देखा, मोहन बिस्तर पर वैसे ही बैठा भय और आश्चर्य से मेरी ओर देख रहा था !!!

इधर मेरे हाथ, चटकनी खोलने और न खोलने की स्थिति में जड़ हो गए !!

5 comments:

  1. भूतों पर एक औसत बुद्धि मजाकिया भूतसूत्र
    हा हा हा

    TITLE; भूत मारने के मात्र तीन तरीके
    १)भूत को सामने से मारो

    इसमें सफलता के चांसेस कम हैं ,इस सूत्र से USSR, पाकिस्तान-US -अरब प्रायोजित भूतों को नहीं मार सका और भरभरा गया .हाहाहा भारत के भूत इसे अपना रोल मॉडल सूत्र मानते हैं हहह थू थू

    २. किसी को भूत बनाकर या बताकर उसके अन्दर फूंट डालकर उसपर कब्जा या हमला कर लो

    पाकिस्तान जैसे अमेरिका के "ROGUE NUCLEAR प्रोलिफेराटर भूतचमचे " भारत में इस प्रोजेक्ट को काफी समय से चला रहे हैं ,अमरीका भी रूस,इराक प्रोजेक्ट चला चूका है और अब इरान में चला सकता है.हाहाहा

    ३) भूतों को आपस में लड़ा दो

    नाटो के भूत सोवियती भूत के विघटन को देखकर काफी चालाक हो गए हैं और वो सोविअत की गलती दोहराने के मूड में एकदम नहीं हैं ,इसलिए वो अभी फिलहाल इस तीसरे टाइप के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं ...इसके तिहरे फायदे हैं

    फायदा 1)यदि भारत ,चीन और पाकिस्तान भूत आपस में उलझते हैं तो तालिबानी भूत अमरीका से उतर कर भारत को पकड़ सकते हैं .

    फायदा 2)एशिया अशांत क्षेत्र हो जाएगा और अमरीका को पछाड़ने वाले चीन और भारत के बौध्हिक सम्पदा के विकास पर रोक लगेगी .

    फायदा ३)चीन से लहूलुहान होकर भारत में एक नया तालिबान टाइप खूंखार आत्मघाती पर देशभक्त मध्यवर्गीय भूतों के समाज का उदय होगा जो चीन के भूतों को प्याऊ खोलकर कम से कम एक दो सदी तक पानी पिलाते रहेगा.इससे भारत का भूत नाटो के भूतों के लिए एशिया का नया इस्राइल /पाकिस्तान भूत बन जाएगा जो समय समय पर तेजी से फूलते (फलते ) चीन के भूतों की हवा निकालता रहेगा एकदम किसी के power balancer chamche की तरह .

    ************
    भारत पर पड़े कुछ भूतों से पीछा छुराने का तरीका :
    भारतीय मध्य वर्ग ke हर व्यक्ति के हाथों में बाहरी भूतो की झ्हराई करने वाली धुआंदार झाडू होनी चाहिए .

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  2. अरे इन मोहन के भुत जेसे किअतने ही भुत ओर होगे, क्यो ना इन्हे भारत चीन, ओर भारत पाकिस्तानी सीमा पर तेनात कर देते, आप ने जरुर कोई सपना देखा होगा.
    धन्यवाद

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  3. घटना मन में सिहरन पैदा कर गई.............
    पर वह भुत उसी समय क्यों आया, जब मोहन घर गया था.............
    कहीं सपना तो नहीं बयां कर दिया...............

    खैर जो भी हो, रचना काफी रोचक और मज़ेदार रही.

    चन्द्र मोहन गुप्त
    जयपुर
    www.cmgupta.blogspot.com

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  4. ऐसी भुतही कहानी मनोरंजन तो करती ही है.

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