Thursday, 7 May 2009

ओडिपस की वाट लगा दी है फ्रायड ने

अपने सिद्धांतों को रखने के लिए फ्रायड ने एक मिथिकल चरित्र ओडिपस की वाट लगा दी है। साइको एनालिसिस के तहत उसने एक नया शब्द दिया है-ओडिपस कंप्लेक्स। ओडिपस कंप्लेक्स का सार यह है कि एक बच्चा विपरित लिंगी होने के कारण अपनी मां के प्रति सेक्सुअली एट्रेक्ट होता है। फ्रायड की इस खोज में कितना दम है इसको लेकर भले ही बहस किया जाये, लेकिन बच्चे की इस मनोवृति के लिए ओडिपस कांप्लेक्स शब्द का इस्तेमाल ओडिपस की व्यथा कथा को गलत तरीके से दुनिया के सामने प्रस्तुत करना है। जिस बच्चे ने अपनी मां को देखा तक नहीं उसके मन में किसी भी तरह की भावना कैसे जागृत होगी ?
ओडिपस के जन्म के समय ही यह भविष्यवाणी की गई कि बड़ा होकर यह बच्चा अपनी पिता की हत्या करेगा और मां से शादी करेगा। इस घटना को रोकने के लिए उसके पिता ने उसे तत्काल मार डालने का इंतजाम किया, लेकिन जिस व्यक्ति को मारने का काम सौंपा गया उसने उसे जिंदा छोड़ दिया और ओडिपस दूसरे के घर में पला-बड़ा,किसी और को अपना माता-पिता समझते हुये। अब बड़ा होने तक जिस बच्चे ने अपने मां की शक्ल तक नहीं देखी उसके मन में मां के प्रति आकर्षण,वह भी सेक्सुअली, कैसे आ सकता है? फ्रायड ने ओडिपस की मार्मिक कथा के साथ बलात्कार किया है, और मजे की बात है मनोविज्ञान की दुनिया में झक मारने वाले ज्ञानी लोग भी लकीर के फकीर तरह बार-बार ओडिपस कांप्लेक्स शब्द का इस्तेमाल करते आ रहे हैं।
ओडिपस के हाथ से अपने पिता की हत्या होती है, लेकिन अनजाने में। उसे पता नहीं होता है कि जिस व्यक्ति के साथ उसका झगड़ा हो रहा है वह उसका पिता है। बड़ा होने पर जब उसे पता चलता है कि उसके संबंध में भविष्यवाणी की गई है कि एक दिन वह अपने पिता की हत्या करके अपनी मां से शादी करेगा तो वह उस घर को छोड़ कर भाग निकलता है, जहां पर उसकी परवरिश हो रही थी। वह उन्हें ही अपना माता-पिता समझता है। लेकिन भविष्यवाणी सच साबित होती है और रास्ते में असली पिता से उसका झगड़ा हो जाता है और उसे मार डालता है। अपने असली पिता के हत्या करने तक उसने अपनी असली मां शक्ल नहीं देखा था,फिर काहे का ओडिपस कंप्लेक्स?
ओडिपस कांप्लेक्स को किसी बच्चे के साथ जोड़ना एक टेक्निकल फाल्ट है। फ्रायड की खोज के मुताबिक हो सकता है एक बच्चा विकास के प्रारंभिक क्रम में अपनी मां के प्रति सेक्सुअली आकर्षित हो,और पिता के प्रति ईष्या का भाव रखता हो,लेकिन इसे ओडिपस कांप्लेक्स नहीं कहा जा सकता। लेकिन जब फ्राडय ने इस शब्द का इस्तेमाल कर ही दिया है तो इस शब्द का इस्तेमाल सही संदर्भ में किया जाना चाहिये और साथ ही इसे एक नया अर्थ भी प्रदान किया जाना चाहिये। ओडिपस पिता की हत्या करने के बाद अपनी मां से शादी करता है और उससे उसे बच्चे भी होते हैं। एक समय अंतराल के बाद उसे पता चलता है कि जिस घर से वह भागा था वह घर उसके असली माता-पिता का नहीं था। इसके बाद वह अपने अपने असली माता-पिता की तलाश करता है। और जब सच्चाई उसके सामने खुलती है है तब वह दुखों के गहरे सागर में डूब जाता है। सच्चाई जानने के बाद वह अपनी मां के पास जाता है।
सच्चाई जानने और मां के पास पहुंचने के समयअंतराल में ओडिपस की मानसिकता क्या रही होगी, इसी को केंद्र बिंदु में रखकर ओडिपस कांप्लेक्स शब्द को नया अर्थ प्रदान करते हुये एक मिथिकल चरित्र को फ्राडय की कुंठित खोज और सोच से मुक्त कराया जा सकता है। ओडिपस के पहुंचने के पहले ही उसकी मां को पता चल जाता है कि उसकी शादी उसके बेटे से हुई है। गहन मानसिक पीड़ा में वह खुद को खत्म कर लेती है, ओडिपस को उसका लाश मिलता है। सच्चाई खुलने के बाद दोनों के बीच कोई संवाद नहीं होता है। अपनी मां के लाश के सामने ही ओडिपस अपनी आंखे फोड़ लेता है और शेष जीवन एक अंधे के रूप में प्राश्यचित करते हुये व्यतीत करता है। इस समयअवधि के दौरान ओडिपस की मानसिकता क्या थी, यह ओडिपिस कांप्लेक्स का विषय वस्तु होना चाहिये,न कि एक मां के प्रति एक बच्चे का सेक्सुअली एट्रेक्शन।

14 comments:

  1. ठीक कहा. असल में ओडिपस ने जो काम अनजाने में किया, फ्रायड ने वही काम जान-बूझ करके कर दिया. केवल ओडिपस के ही नहीं, मुझे तो लगता है कि शायद ख़ुद अपने साथ भी. जिसे फ्रायड ने ओडिपस कॉम्प्लेक्स कहा है, अगर उसे फ्रायड कॉम्प्लेक्स कहा जाए, तो शाय्द ज़्यादा सही होगा.

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  2. काफी गंभीर विषय, लेकिन सधी हुई लेखनी ने इसे समझने में आसान बना दिया. बधाई.

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  3. ईडीपल काम्प्लेक्स बच्चे का मां पिता के प्रति सेक्सुअल आकर्षण है और बड़ी उम्र के लोगों का कम उम्र /बच्चों के प्रति सेक्स व्यवहार पीडोफिलिया है ! इस पर भी लिखा जाना चाहिए ! ये दोनों ही असामान्य व्यवहार हैं

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  4. डॉ अरविन्द जी नें सही फरमाया है ,तनिक इस पर भी विचार करें .

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  5. there should not be any doubt that Oedipus complex is a strange and undigestable piece for indians but as our culture is getting western shades,this complex will also become apart of many new complications. Overall ,goodwishes for raising an important issue.
    hari shanker rarhi

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  6. आपको आधी बात कहके मामले को अनावश्यक विवादित बनाने की आवश्यकता नहीं है। मेल चाइल्ड में ‘ऑडिपस काम्प्लेक्स’ की ही तरह फीमेल चाइल्ड के भीतर ‘इलेक्ट्रा काम्प्लेक्स’ का भी वर्णन फ्रायड ने किया है। इलेक्ट्रा नामक चरित्र उस राजकुमारी का है जो अपने पिता पर मुग्ध हो जाती है और पिता जैसा वर चाहती है।

    वस्तुतः फ्रायड ने एक खास अवधारणा को समझाने और ठीक से याद रखने लायक बनाने के लिए इन ग्रीक पौराणिक पात्रों का सहारा लिया। ऑडिपस चरित्र के आरोपण का तात्पर्य मात्र इतना है कि बालक के यौन-मनोवैज्ञानिक विकास (psycho-sexual development) के प्रारम्भिक चरण में सर्वप्रथम सम्पर्क में आने वाली विपरीत लिंग की व्यक्ति उसकी माँ होती है जिसके प्रति एक सहज यौन आकर्षण पैदा होता है। यह भाव अगले चरणों में अपना स्वरुप बदल लेता है। इसी प्रकार बालिका सबसे पहले अपने पिता के रूप में ही पुरुष स्पर्श का अनुभव पाती है। किन्तु इस कॉम्प्लेक्स की अवधि छोटी होती है।

    पौराणिक पात्रों की पूरी कहानी को एक सिद्धान्त के नाम में खोजने का आग्रह आवश्यक नहीं है। वर्ना हमारी भाषा का सौन्दर्य कम होते देर नहीं लगेगी। क्या हम ‘त्रिशंकु संसद’ का अर्थ समझने के लिए विश्वामित्र की कहानी की पड़ताल करने की जरूरत महसूस करते हैं? इसका प्रयोग तो केवल hung parliament के हिन्दी अनुवाद (लटकी हुई) को सुग्राह्य तरीके से समझने के लिए होता है। स्वयं संसद तो कहीं लटकती नहीं है। लटकता तो सरकारों, नेताओं और पार्टियों का भविष्य है :)

    वैसे परवर्ती मनोवैज्ञानिकों ने व्यक्तित्व विकास के दूसरे अनेक सिद्धान्त प्रतिपादित किए हैं जिनमें फ्रॉयड काफी पीछे छूट गये हैं। लेकिन इससे उनका महत्व कम नहीं हो जाता। उनका स्थान मनोविज्ञान में वही है जो भौतिकी में न्यूटन का है।

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  7. रोचक एवं उपयोगी पोस्ट है।

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  8. त्रिपाठी जी की बातों में दम है.

    वैसे ये कहना की पाश्चात्य सभ्यता के तथाकथित दुष्प्रभाव से हम मुक्त है, ठीक नहीं है. इसी सोच की गलती के कारणवश AIDS का हमे बुरा रूप देखना पड़ रहा है.

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  9. अद्‍भुत जानकारी...दिलचस्प

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  10. siddhartha bhai
    aapke tark me dam hai. lekin buniyadi baat yah hi ki agar pauranik patro ka prateek ke taur par karna ho to unhe unake mool sandarbh se tod kar nhi dekha jaana chahie. agar odipus ke masle ko dekha jae to uske bhitar apni maa ke prati koi aakarshan nhi tha. vastutah yah kewal ek durghatana hai. pahle aam taur par aisa hota raha hai ki haare hue raja ki patni par bhi vastuon ki tarah vijeta ka adhikar ho jata tha. odipus aur usase judi kuch aur kahaniyan padhne par mujhe lagta hai ki uska pura mamla kul mila kr bas itna hi hai. aakarshan usme kabhi rha ho apni maa ke prati, aisa us puree katha me kahi nahi ata. jabki freud ka aagrah jahaan tak ki main janta hun, shaayad aakarshan par hi hai. bas yahi ek galati hai. mera khayal hai ki freud ne ya to odipus ke masle ko thik se samjha nhi ya fir use apne dhang se twist karke istemaal kar dala. kya ise aap sahi mante hain?
    rahi baat pashchaty aur paurvaty sanskriti ke pachde ki, to isme mujhe koi dam nhi dikhata. n to hamari sanskriti me sab kuch achchha hai aur n pashchim me sab kuch bura.

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  11. जो कुछ हुआ वो दुर्भाग्य से हुआ था .........फ्रायड ने उसे .. मनोरोगियों से जोड़ा है .फ्रायड यहाँ गलत सन्दर्भ लेते है

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  12. सिद्धार्थ जी, फ्रायड ने अपने सिद्धांध में क्या बकवास किया है, उसकी परते खोलने के मेरा कोई इरादा नहीं था। मैं तो बस ओडिपस की बात कर रहा था। उस ओडिपस जिसकी कहानी कुदरत ने पहले से ही लिख रखी थी। ईष्टदेव जी ने इसे सही तरीके से खोला है। डाक्टर अनुराग भी इसी बात की ताकीद कर रहे हैं। फिलहाल मनोविज्ञान या फ्रायड के सिद्धांतों पर लिखने का कोई इरादा नहीं है। मन के परतों की जितनी अच्छी व्याख्या महाभारत और गीत में है, उस पर चिंतन मनन किया जा सकता है। फ्रायड ने एक मिथिकिल कैरेक्टर को लेकर बस लोगों को गुमराह किया है। ओडिपस की चर्चा किये बिना वह अपनी थ्योरी को कैसे रखता।

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  13. इस विश्लेषणात्मक आलेख के लिये आभार.

    फ्रायड ने कई सारे ऐसे सिद्धांत प्रचरित किये हैं जिनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है. ईडिपस-काम्प्लेक्स का सिद्धांत इन में से एक है.

    सस्नेह -- शास्त्री

    हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है
    http://www.Sarathi.info

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