Tuesday, 20 January 2009

मन्नू और गुन्नू

(लघु कथा)
तीन साल का गुन्नू हमेशा अपनी एक साल बड़ी बहन मनू के पीछे दुमछल्ले की तरह लगा रहता है। जो मनू को चाहिये, वही गुन्नू को भी चाहिये। नहीं मिलने पर हल्ला मचाएगा,गला फाड़ेगा और कभी मन्नू के मुंह पर नाखून भी मार देगा। मन्नू भी कम नहीं है। हर वक्त वह गुन्नू को रुलाने में ही लगी रहती है। किसी भी सामान को लेकर वह घर में इधर-उधर भागेगी और गुन्नू उसके पीछे दौड़ते हुये चिल्लाता रहेगा। मम्मी झपटकर अक्सर दोनों का एक साथ कूटमस कर देती है। थोड़ी देर की चुप्पी के बाद यह सिलसिला फिर शुरु जाता है। पापा को बच्चों को पीटने में यकीन नहीं है। दोनों बच्चे इस बात को अच्छी तरह से समझ चुके हैं। घर में पापा का पूरा समय इन दोनों बच्चों के झगड़े सुलझाने में ही जाता है।
उस दिन पापा घर में पिछले तीन घंटे से बैठकर कुछ लिखने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन मन्नू की हरकतों के कारण उन्हें बार-बार अपनी कु्र्सी से उठकर बीच बचाव करना पड़ रहा था। अंत में उनका धैर्य भी जवाब दे गया और उन्होंने मन्नू के दोनों हाथ पकड़ कर लगे उसे धमकाने, ''खबरदार जो अब तुने गु्न्नू को परेशान किया। तुझे समझ नहीं है कि तू इसकी बड़ी बहन है। एक ही तो तेरा भाई है और तू उसे भी रुलाती रहती है।''
मन्नू को पापा के कैद में देखकर गुन्नू खिलखिलाकर हंस रहा था। जैसे ही पापा मन्नू का हाथ छोड़ कर फिर लिखने के लिये जाने लगे वैसे ही मन्नू टेबल पर पड़े एक पेन्सिल को उठाकर गुन्नू से बोली, ''ये मेरा पेन्सिल है।''
गुन्नू मन्नू के हाथ में पेन्सिल को देखकर लगा चिल्लाने। पापा को तेज गुस्सा आया और उन्होंने मन्नू का हाथ पकड़कर उसके गाल पर एक हल्का तमाचा मारा। बगल में खड़े गुन्नू ने बिना सोचे समझे ही अपने छोटे-छोटे हाथ से पापा के मुंह पर अपनी पूरी शक्ति लगाकर एक जोरदार तमाचा मारा। मन्नू को छोड़कर पापा गून्नू की ओर झपटे, ''अबे कुत्ते, मैं तेरे कारण इसे पीट रहा हूं और तू मुझे पीट रहा है।''
इसके पहले कि पापा गुन्नू की खबर लेते मन्नू पीछे से पापा पर झपट पड़ी। मम्मी बहुत देर से यह तमाशा देख रही थी। वह एक साथ गुन्नू और मन्नू की ओर दौड़ी। दोनों बच्चे तेजी से दौड़ कर पापा से लिपट गये। दोनों बच्चों को अपनी बाहों में समेटते हुये पापा, मम्मी पर चिल्ला उठे, इनकी अंतिम गलती है। इन्हें माफ कर दो।
मम्मी बोली, आप सामने से हट जाइये, मैं इन दोनों को बहुत देर से देख रही हूं।
'' मैंने कहा न इनकी अंतिम गलती है।''
''आपने दोनों बच्चों को बिगाड़ रखा है। ''
''और तुम्हे किसने बिगाड़ रखा है। ''
दोनों बच्चे भागकर एक कोने में चले गये। मन्नू ताली बजाकर बोली, ''मम्मी पापा लड़ रहे हैं।
उसके पीछे-पीछे पुच्छला गुन्नू तोतली आवाज में बोला,''मम्मी पापा लड़ रहे हैं।''
मम्मी-पापा एक दूसरे की ओर देखकर मुस्काराने लगे।

4 comments:

  1. ये बच्चे लेखक के नहीं किसी नेता के लगते हैं.

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  2. क्या बात करते हैं इष्ट साहब , मुझे कुछ दुविधा है


    ---आपका हार्दिक स्वागत है
    चाँद, बादल और शाम

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  3. भाई आप लोग तो डाउट क्रिएट कर रहे हैं

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