Saturday, 27 December 2008

युद्ध ! युद्ध !! युद्ध !!!

बहुत बकबास सुनाई दे रहा है चारो तरफ, युद्ध युद्ध युद्ध ! क्या होता है युद्ध? तीन घंटे की फिल्म,ढेर घंटे का नाटक, ट्वेंटी-ट्वेंटी का क्रिकटे मैच, कविता पाठ ? क्या होता है यह युद्ध?
युद्ध में मौत तांडव करता है और खून बहती है, गरम-गरम। इनसानी लोथड़े इधर से ऊधर बिखरते हैं और धरती लाल होती है। युद्ध ब्लॉगबाजी नहीं है। एक बार में सबकुछ ले उड़ेगी। जमीन थर्रायेगा, आसमान कांपेगी और हवाएं काली हो जाएगी, क्योंकि दुनिया परमाणु बम पर बैठी हुई है। लोग सांस के लिए तरसेंगे।
चलो माना कि रगो में लहू दौड़ रही है। और जब लहू उफान मारेगी तो युद्ध का उन्माद खोपड़ी पर चढ़ेगा ही। कोई समझा सकता है कि युद्ध का उद्देश्य क्या है??? अब यह मत कहना कि पाकिस्तान को सबक सीखाना है। यह सुनते-सुनते कान पक चुका है। जिस वक्त पाकिस्तान का जन्म हो रहा था, उसके बाद से ही उसे सबक सीखाने की बात हो रही है। अब यह सबक सीखाने का तरीका क्या होगा ? सेना लेकर पाकिस्तान के अंदर घुस जाना और कत्लेआम करते हुये इस्लामाबाद की ओर बढ़ना ? यह सबकुछ करने में कितना समय लगेगा ?
सेना में जमीन स्तर पर रणनीति तैयार करने वालों से पूछों। वो भी दावे के साथ कुछ नहीं बता पाएंगे। यदि थोड़ी देर के लिए यह मान भी लिया जाये कि सेना 40 घंटे में इस्लामबाद तक पहुंच जाती है, हालांकि इसकी संभावना न के बराबर है, फिर आगे क्या करना है ??? युद्ध के उद्देश्य को लेकर दिमाग में कोई स्पष्ट सी बात है ??? युद्ध करेंगे !!! सरकार में बैठे लोगों को भी होश नहीं है कि वो क्या बक रहे हैं। वो जो कुछ भी बक रहे हैं, जनता के उन्माद के दबाव में बक रहे हैं।
नीत्शे कहता है, शांति चाहो, लेकिन अल्पकालीन,वह भी इसलिए कि एक नई युद्ध की तैयारी कर सको। दुनियां में जो कुछ श्रेष्ठ है सब युद्ध की बदौलत ही है। युद्ध साध्य है, साधन नहीं। बकबासियों यदि नीत्से की बात नहीं मानते हो, तो जरा समझाओ कि इस युद्ध का उद्देश्य क्या है ? बेशक युद्ध करो, लेकिन उसका उद्देश्य स्पष्ट रूप से बताओ। क्या इस युद्ध के बाद दुनिया के नक्शे से पाकिस्तान का नाम हमेशा के लिए गायब हो जाएगा?? यदि नहीं, तो नहीं चाहिए युद्ध। और यदि हां,तो थोड़ा सब्र करना होगा। सीधे सरकार बदलो, और एक नई सरकार बनाओ, जो पूरी तरह से युद्ध के लिए ही बनी हो। दो साल तक व्यवस्थित तरीके से जनता को युद्ध के लिए प्रशिक्षित करो, हर स्तर पर। और फिर युद्ध शुरु करो,तब तक लड़ो जब तक भारत का प्राचीन नक्शे को मू्र्तरूप न दे दो, अथक और अविराम लड़ने की क्षमता चाहिये। दुनिया के अन्य मुल्कों से डिप्लोमैटिक वार और इकोनॉमिक ब्लॉकेज के लिए पूरी तरह से कमर कसो।
यदि ये सब नहीं हो सकता, तो चूपचाप अपना काम करते रहो, जो कर रहे हो। घर के लिए सब्जी लाओ, बच्चों को अपनी बीवी के साथ घूमाने ले जाओ, नौकरी धंधा करो, और अपना जीवन चलाओ। छोड़ दो यह युद्ध उनके लिए, जो एसा करने का मादा रखते हैं, और इंतजार करो, क्योंकि युद् तो प्रकृति का स्वभाव है। प्रकृति खुद उनलोगों का चयन करेगी, जो उसके स्वभाव के अनुरूप अनवरत युद्द के लिए कमर कसे हुये है। गौर से देखो अपने अगल-बगल,यदि तूम अपने आप को युद्ध में खड़े देख रहे हो तो,समझो प्रकृति ने तुम्हारा चयन कर लिया है। यदि नहीं तो बकबासियों की तरह मत चिल्लाओं कि सबक सीखाना है।

5 comments:

  1. आप ठीक कह रहे हो भाई

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  2. bhai, baat to thheek bole, par lekh me galtiyan khoob-khoob kar dali. thoda vertani par dhyan dijiye. lekh ke ant me bahoot achhi-achhi baat kahi.

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  3. taslim bhai, koshis karung ki aage vertani ki galtiya na ho...vaise unicode per hindi type karane me mujhe paresani hoti hai. Laga hunay hun, sudhar jayega. aapane is oor dhyan dilaya isake liye shukriya.

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  4. taslim bhai, koshis karung ki aage vertani ki galtiya na ho...vaise unicode per hindi type karane me mujhe paresani hoti hai. Laga hunay hun, sudhar jayega. aapane is oor dhyan dilaya isake liye shukriya.

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  5. bhrastaachar se yuudh,adoordarshita se yuudh ,ashikha se yuddh ,dharmandhata se yuudh,aalasya aur akarmanyaata se yuudh,kaayarta se yuudh,deshdrohiyon se yuddh,haiwaaniyat se yuudh.....yuudh yuudh yuudh yuudh yuudh

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