Thursday, 27 November 2008

मुंबई का वार जोन

1.
मुंबई उड़ गई
...अबे साले कहां है
... ....क्या हुआ ? ....
...तेरी मां की...जो पूछ रहा हूं, वो बता....
..साले होश में रह, नहीं तो घुसेड़ दूंगा...
...बेटा मुंबई उड़ गई है....
..हुआ क्या... ..
...तेरी मां की...बेटा मुंबई उड़ गई है,और मझे रिपो्रट चाहिये..और हां कुछ..चल बात में बाद होती है...दीपक के कुछ कहने के पहले ही, उधर से फोन की लाईन कट गई। -
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2.
--साला, अखबार का सारा स्टॉक की खलास है। रात भर की अफरातफरी के बाद का कुछ आलम यह था। ठसाठस भरी रहने वाली बसे खाली खालीदौड़ रही थीं। ओशिवारा बस डिपों में बसों की कतार लगी हुई थी। रातभर की गतिविधियों के बाद मुंबई की सड़कों पर दीपक चलता जा रहा था। बदलते दृश्यों के बीच दीपक की आंखों के सामने रात की घटनाएं तेजी से तैर रही थी।
3.
....बहन की भूत, कहां पहुंचा,...
...पता नहीं......साले बार जोन में घुस,.....
.लेकिन ये है किधर... .
..बहन की भूत,वहां तू बैठा है...
दीपक के कुछ कहने के पहले ही, उधर से फोन की लाईन एक बार फिर कट गई।............
4.
....अबे साले कहां है.....
...दारू पी रहा हूं.....
...कहां.....
.दारू खाना में....
...निकल वहां से,वार जोन खोज में घुस.....
.वार जोन, ई का होता है...लड़ाई किधर हो रही है.....
...मुंबई में...
..आधा दाड़ू बचा हुआ है......
...गटक और निकल..
फोन पर बकबकाने के बाद दीपक आगे बढ़ता जा रहा था....

2 comments:

  1. नायाब
    मैं समझ सकता हूं।
    सटीक अभिव्यक्तिकरण

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  2. ... छापे जाओ, क्या फर्क पडता है, सब कुछ अपना है।

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