Tuesday, 1 April 2008

हिन्दी ब्लॉगर ने छुआ लाख का आंकडा

यह हम सभी हिन्दी ब्लागरों के लिए हर्ष की बात है कि एक हिन्दी ब्लॉगर ने एक लाख हित का आंकडा छू लिया है. हमारे लिए यह ज्यादा हर्ष की बात खास तौर से इसलिए है कि यह उपलब्धि हमने अपनी टांग खिचाई, बेमतलब सिर फुटौवल, अंधी गुटबंदी और ईर्ष्या-द्वेष की अपनी चिरंतन आदर्श वृत्तियों को बरकरार रखते हुए हासिल की है. अपनी मूलभूत परम्परा छोड़ कर तो बहुत लोग तरक्की कर लेते हैं, हमने यह उपलब्धि अपनी परम्परा छोड बगैर हासिल की है. इसी परम्परा को समर्पित है यह लिंक :

स्वागत है श्रीमान आपका भर-भर भरें बधाई·
कुछ तो मारा भ्रष्ट्राचार ने कुछ मार रही महंगाई
हम भी वही बनाते जो दशकों से बना रहीं आपको
कांग्रेस, भाजपा, सपा, बसपा, सीपीएम, सीपीआई

हैप्पी पहली अप्रैल

16 comments:

  1. बधाइ हो इष्ट देव जी ,कमाल है जी आप फ़ल बनने की इस उम्र मे फ़ूल बने है,और अब दुसरो को बनाने निकल पडे है,मै तो बस यहा आपको यहा अकेले नही देखना चाहता था इसी लिये चला आया..:)

    ReplyDelete
  2. चलिए! किसी बहाने आए तो सही. स्वागत है!!

    ReplyDelete
  3. http://nukkadh.blogspot.com/
    http://jhhakajhhaktimes.blogspot.com/
    http://bageechee.blogspot.com/
    http://avinashvachaspati.blogspot.com/

    आपके लिए उपयोगी लिंक्‍स, महत्‍वपूर्ण सूचनाएं.

    ReplyDelete
  4. तेताला जी
    क्या इन दुकानों पर ही यही व्यंजन बनाया जा रहा है?

    ReplyDelete
  5. ishtdev ji
    1 lakh ki sannkhya mein 1 april ko pahunch gaye.
    barhiya hai....
    chirantan vrittiyon ki soochi mein laffaaji ko bhool gaye.
    barhiya hai...
    parampara se chipakne ko uplabdhi bata gaye.
    barhiya hai...
    rajneeti,mahangaee,aur bhrast-tantra kee line mein khade huay ulloo banaa gaye.
    barhiya hai...

    ReplyDelete
  6. वाह सिद्धार्थ बाबू
    आप तो सुनील बाबू की याद दिला गए....
    बढ़िया है.

    ReplyDelete
  7. आप अभी अप्रेल फूल बना राहे हैं लेकिन भविष्य में 2 से भी ज़्यादा होंगे

    ReplyDelete
  8. इष्टदेव जी, एक लाख से अधिक पेज व्यूज की सीमा (केवल हिट ही नहीं) कई हिन्दी ब्लाग पार कर चुके हैं.
    कुछ ब्लाग्स ने यह कारनामा कई वर्षों में कर पाया है जबकि कुछ ब्लाग्स ने इसे केवल कुछ ही महीनों में कर लिया है.

    ReplyDelete
  9. हाँ-हाँ! अभी वे छः दिन तक और ऐसा कर सकते हैं. अप्रैल का पूरा पहला हफ्ता ऎसी ही कारगुजारियों को समर्पित होता है.

    ReplyDelete
  10. परंपरा-पकड़ ये लिंक आपका वाह-वाह राम दुहाई
    मूर्ख-दिवस की विकट बुद्धि ये सचमुच बहुत सुहाई!

    ReplyDelete
  11. जो होना है होकर रहता है. देखिये हम १ को बच गए तो २ तारीख को अप्रैल फूल बन गए. :)

    ReplyDelete
  12. अजी जनाब..कुछ अजूबा बताते...आपकी काबिलियत देख हम तो इसे सच माने जा रहे थे तो बधाई कह उठे..खैर, कोई नहीं..जल्द असल में भी देनी ही पड़ेगी तो अभी से एडवान्स में रख लें. :)

    ReplyDelete
  13. sch bhi kho to koi viswas nhi krta aajkl :-)

    ReplyDelete
  14. जी लवली जी
    अब देखिए न! लोग इतनी सीधी सच्ची बात भी मानने के लिए तैयार नहीं हैं. सबको लग रहा है की हम बना रहे हैं.

    ReplyDelete

सुस्वागतम!!