Thursday, 13 December 2007

अपनी राम कहानी है


रतन
सपनों के बारे में कहना
कुछ कहना बेमानी है
दुनिया के लोगों जैसी ही
अपनी राम कहानी है
सोना चांदी महल इमारत
सब कुछ पल के साथी हैं
सच यह है कुछ और नहीं है
जीवन दाना पानी है
गम और खुशियाँ रात दिवस ये
शाम सुबह और सूरज चाँद
ये वैसे ही आते जाते
जैसे आनी जानी है
अगर मगर लेकिन और किन्तु
ये सब हमको उलझाते
इन पर वश तब तक चलता है
जब तक साथ जवानी है
अपनी राह नहीं है सीधी
चिंता गैरों को लेकर
उनके बारे में कुछ कहना
आदत वही पुरानी है

1 comment:

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