Thursday, 13 December 2007

बचपन से ही दारू... क्या बात है भाई




ये तो पी के टुन्न हो गया। सिगरेट पीने की भी औकात नहीं। बीयर पीता था।





अभी से चुम्मा चाटी शुरु, कहां से सीखा गुरु।




जवानी के जलवे, चलो दाढ़ी बना लेते हैं।




अरे वाह क्या जलवा है कुमार शानू का। बिल्ली से लेकर शेर। सभी म्यूजिक से झूम रहे हैं।

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