Sunday, 7 October 2007

कहाँ मिलता है!



विनय ओझा स्नेहिल
हर एक शख्स बेज़ुबान यहाँ मिलता है.
सभी के क़त्ल का बयान कहाँ मिलता है.
यह और बात है उड़ सकते हैं सभी पंछी
फिर भी हर एक को आसमान कहाँ मिलता है.
सात दिन हो गए पर नींद ही नहीं आयी
दिल को दंगों में इत्मीनान कहाँ मिलता है.
न जाने कितनी रोज़ चील कौवे खाते हैं
हर एक लाश को शमशान कहाँ मिलता है.

2 comments:

  1. nice post :) thanks 4 ur visit and we try our best to give u information as required by you.

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  2. दिल को दंगों में इत्मीनान कहाँ मिलता है.
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    बहुत सूक्ष्म समझ है मनस की!

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