Tuesday, 14 August 2007

तकदीर ले आना मेरी


मुस्कुराऊँ ख्वाब की ताबीर ले आना मेरी
जो खबर सबको करे ताईर ले आना मेरी
कर न पाओ ग़र भला तो क्यों बुरा हो सोचते
है खलल मुझसे अगर शमशीर ले आना मेरी
देख
कर जिनको मेरे गुजरे ज़माने याद आये

पास
तेरे हैं जो वो तस्वीर ले आना मेरी

सांस उखड़ी जा रही है धड़कनें भी मन्द हैं
बाँध कर रखे इन्हें जंजीर ले आना मेरी
लूट कर जो ले गए परछाई भी तनहाई में
बोझ तो कुछ होगी ओ जागीर ले आना मेरी
ग़र खुदा के पास जाना तो करम करना रतन
मेरी खातिर भी थोड़ी तकदीर ले आना मेरी
रतन

2 comments:

  1. ग़र खुदा के पास जाना तो करम करना रतन
    मेरी खातिर भी थोड़ी तकदीर ले आना मेरी


    -वाह भई, रतन जी दाद कबूलें.

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