Tuesday, 21 August 2007

अखबार की बातें


है मन में इनकार की बातें

ऊपर से इकरार की बातें

मतलब की है दुनिया सारी

हर जगहा व्यापार की बातें

हो भद्दी सी गाली कहते
हैं प्यारी सरकार की बातें

हत्या लूट डकैती चोरी

यह सब है अखबार की बातें

आये सुकूं जो बातें सुनकर

मुद्दत हो गईं यार की बातें

गुल गुलशन गुलफ़ाम की बातें

आओ कर लें प्यार की बातें

रतन

3 comments:

  1. हत्या लूट डकैती चोरी
    यह सब है अखबार की बातें ...

    सच में यही तो रह गया है. आप तो सब छोड़ो, बस हमारा ब्लॉग पढ़ा करो. सुकुन मिलेगा. :)

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  2. Guru, pyar ki baten karna to theek hai, lekin mera ek objection hai...
    Hatya loot daquaiti chori, yah sab hai akhbaar ki baten ...
    aisa nahi hai. mai delhi aa gaya hu aur economic page per kaam kar raha hun , use bhee parhen.

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  3. Kavita BehatarHai- Koshish kijeeya Ratanjee-ramnayansingh

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