Sunday, 17 June 2007

चतुष्पदी

हम मुश्किलों से लड़के मुकद्दर बनाएँगे.
गिरती हैं जहाँ बिजलियाँ वहाँ घर बनाएँगे.
पत्थर हमारी राह के बदलेंगे रेत में -
हम पाँव से इतनी उन्हें ठोकर लगाएंगे..
विनय स्नेहिल

No comments:

Post a Comment

सुस्वागतम!!