Saturday, 16 June 2007

समझती नहीं

एक दिन मेरे एक बहुत पुराने दोस्त मेरे घर आए. बचपन के साथी थे तो बड़ी देर तक बातें होती रहीं. कई यार-दोस्तो के चर्चे हुए. अब बातें तो बातें हैं, उनका क्या? जहाँ चार अच्छी बातें होती हैं, दो डरावनी बातें भी हो ही जाती हैं. तो बातें चली और यार-दोस्तो से होते हुए बीवियों तक भी आ गईं. दोस्त ने बताया कि मेरी बीवी तो यार अपने आप से ही बातें करती है.
' अपने आप से बातें तो मेरी बीवी भी करती है, पर वह इस बात को समझती नहीं है. उसे लगता है कि मैं सुन रहा हूँ.' मैंने उन्हें बताया.

2 comments:

  1. अरे भाई मेरी बीवी ब मुझ से बात करती है, तो मैं सोचता अपने से बोल रही है।

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  2. सच कह रहे हो भाई… यह तो मात्र प्रक्षेपण होता है…।सत्य कुछ भी नहीं!

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