Tuesday, 1 May 2007

बहुत दिनों तक

बहुत दिनों तक
रहा
हमारे जीवन में,
घंटों फिरना बेमतलब
रूमानी होना
दुनिया भर के
मसलों का
बेमानी होना

रहा
हमारे जीवन में

बहुत दिनों तक.


बहुत दिनों तक
रहा
हमारे जीवन में,

साथ हवा के
पत्तों जैसे
हिलना-डुलना.
किस्सों वाली

परियों से
मिलना-जुलना.

हर मुश्किल की
छाती पर
आसानी बोना
रहा हमारे जीवन में
बहुत दिनों तक.


बहुत दिनों तक
रहा
हमारे जीवन में,
आखों में
घिरना बादल
तिरना मोती का.
रोटी के संग
आगे-पीछे
फिरना धोती का.

और अंत में
पाना
सब नादानी होना
रहा
हमारे जीवन में

बहुत दिनों तक.

बहुत दिनों तक
रहा
हमारे जीवन में.



इष्ट देव सांकृत्यायन

No comments:

Post a Comment

सुस्वागतम!!