Monday, 14 May 2007

इनसे मिलें


जब कभी
हो जाएँ
अनमन,
इनसे मिलें -


पेड-चिड़िया
हवा-बादल.
नदी-झरने
और

गंगाजल.
शिशु चपल की
किलक निर्मल.
रुनझुनाती हुई
पायल.

जब कभी
हो जाएँ
अनमन,

इनसे मिलें.

जब कभी
हो जाए
अनबन,

इनसे मिलें -

फूल-फलियाँ
दूब-जंगल
भौंरे और
तितलियाँ चंचल,
खेत-फसलें
कूप-नहरें
किवाड़-आंगन और
सांकल.

जब कभी
हो जाए
अनबन,
इनसे मिलें.


जब कभी
हो जाएँ
अनमन,
इनसे मिलें.


इष्ट देव सांकृत्यायन


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