Tuesday, 1 May 2007

कौन गया

मेरे
आंगन के
तुलसीचौरे पर -
दीप जला कर
कौन गया?
शालिग्राम पर
श्रध्दा के
फूल
चढ़ा कर
कौन गया?

टिमटिम करता दिया
न जाने
क्या-क्या
कह जाता है.
सब कुछ
कह कर भी
वह
चुप ही
रह जाता है.

अनमनपन की
चादर ताने
सोया था
मधुमास-
जगा कर
कौन गया?

मैंने ले लिया
न जाने
कैसे
अश्वमेध का संकल्प.
अग्निहोत्र से
बचने का
अब
कोई नहीं
विकल्प.

इस थाली में
कुमकुम
अक्षत
दूब
सजा कर
कौन गया?

इष्ट देव सांकृत्यायन

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