Saturday, 28 April 2007

पहुंचा, कि नहीं

घूरे को
बूंदाबांदी के बाद
घाम,
बूढ़े बरगद को
सादर प्रणाम -
पहुँचा कि नहीं?

खादी की धोती के नीचे
आयातित ब्रीफ,
और स्वदेशी के नारे पर
रेखांकित ग्रीफ.

अंकल ने पूछा है,
पित्रिघात का
पूरा दाम -
पहुँचा कि नहीं?

समान संहिता
आचार-विचार की
मरुथल में
क्रीडा
जल-विहार की

फिर भी देखो
व्हाइट हॉउस को
जय श्री राम -
पहुँचा कि नहीं?

इष्ट देव सांकृत्यायन

No comments:

Post a Comment

सुस्वागतम!!