Saturday, 28 April 2007

बातें अपनी सी

सर जमीन-ए-हिंद पर अक्वाम-ए-आलम के फ़िराक
क़ाफ़िले बस्ते गए हिन्दोस्तां बनता गया
फिराक गोरखपुरी

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