Saturday, 28 April 2007

इन आंखों में

पूरब से
आती है
या आती है
पश्चिम से -
एक किरण
सूरज की
दिखती है
इन आखों में.

मैं संकल्पित
जाह्नवी से
कन्धों पर
है कांवर.
आना चाहो
तो आ जाना
तुम स्वयं
विवर्त से बाहर.

तुमको ढून्ढूं
मंजरियों में
तो पाऊं शाखों में.
इन आखों में.

सपने जैसा
शील तुम्हारा
और ख्यालों
सा रुप.
पानी जीने वाली
मछ्ली ही
पी जाती है धूप.

तुम तो
बस
तुम ही हो
किंचित
उपमेय नहीं.

कैसे गिन लूं
तुमको
मैं लाखों में.
इन आखों में.

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